‘मायासभा’ की रिलीज 30 जनवरी को होने वाली है और अभिनेता जावेद जाफरी इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने शूटिंग के समय बाकी सारे प्रोजेक्ट्स को साइडलाइन कर दिया, ताकि किरदार पर सौ फीसदी ध्यान रह सके।
बातचीत में जावेद ने कहा कि एक्टर को लेखक-निर्देशक के क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए। स्क्रिप्ट साल भर की कमाई है, उसे मनमाने ढंग से न बदलें। सवाल करें, लेकिन जवाब मिलने पर स्वीकार करें।
निर्देशक की दुनिया में एक्टर का रोल सपोर्ट करना है। कभी-कभी वे कहते हैं, ‘यहां हंसो मत, इशारा मत करो’, क्योंकि इससे किरदार की एकरूपता टूटती है। जावेद नए सुझाव देते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उनका।
कॉमेडी हो या ड्रामा, जावेद का जुनून साफ दिखता है। ‘मायासभा’ में उनका नया रूप दर्शकों को चौंका देगा।
यह फिल्म साबित करेगी कि समर्पण से ही बेहतरीन परफॉर्मेंस मिलती है। जावेद का अनुभव इंडस्ट्री के लिए प्रेरणा स्रोत है।