झारखंड की सियासत में नया मोड़ आया है। पूर्व विधायक अकील अख्तर ने AIMIM का हाथ थाम लिया, जो हैदराबाद में ओवैसी के समक्ष औपचारिक रूप से हुआ। इससे पार्टी को संथाल परगना में मजबूती मिली है।
अकील ने कहा, AIMIM वंचितों के हक की लड़ाई लड़ती है। उनके शामिल होने से झारखंड इकाई को बल मिलेगा।
अध्यक्ष ओवैसी ने स्वागत किया, ‘उनके राजनीतिक ज्ञान से हमारा विस्तार सुगम होगा।’ प्रदेश नेतृत्व जैसे शाकिर, आलम और जावेद भी वहां थे।
अकील ने JMM से करियर शुरू किया, निष्कासन झेला, अपनी पार्टी चलाई। 2024 में सपा टिकट पर हारे, मगर धनाढ्य छवि बनी रही।
AIMIM अब झारखंड में संगठनात्मक मोर्चेबंदी तेज करेगी। स्थानीय मुद्दों पर फोकस से वोटरों को लुभाने की योजना है। यह कदम पारंपरिक दलों के लिए खतरे की घंटी है।