मिस्र भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कमर कस रहा है। देश का लक्ष्य द्विपक्षीय कारोबार को मौजूदा दो अरब डॉलर से दोगुना कर 12 अरब डॉलर करना है। यह बात भारत में मिस्र के राजदूत कामेल जायद गलाल ने नई दिल्ली के एक कार्यक्रम में कही।
दक्षिण एशिया फॉरेन कॉरस्पॉन्डेंट्स क्लब में उन्होंने ऊर्जा, उत्पादन, खेतीबाड़ी और संपर्क स्थापना जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रगति के रास्ते बताए। भारतीय निवेश मिस्र में 3.7 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा 10 अरब से अधिक होने की उम्मीद है।
गलाल ने भारतीय फर्मों को मिस्र को स्थायी रणनीतिक साथी मानने की सलाह दी। सौर-पवन ऊर्जा के अपार भंडार, विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रमुख समुद्री रास्तों तक पहुंच मिस्र को नवीकरणीय ऊर्जा निर्यात का हब बना सकती है।
उर्वरक, कृषि उत्पादन एवं उद्योगों में सहयोग बढ़ेगा। अफ्रीकी एवं यूरोपीय देशों से FTA तथा औद्योगिकゾन उत्पादन व निर्यात के लिए आदर्श हैं। स्वेज नहर वैश्विक व्यापार का 12 प्रतिशत संभालती है, जो मिस्र को व्यापारिक केंद्र बनाती है।
मोदी-सिसी शिखरवार्ताओं के बाद रणनीतिक साझेदारी बनी। अब आर्थिक परिणामों पर जोर है। मिस्र बहुपक्षीय सहयोग, स्वायत्तता एवं संप्रभुता का समर्थक है, जो भारत से मेल खाता है। यह साझेदारी दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।