डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों भरी व्यापार राजनीति से परेशान यूरोपीय संघ अब अमेरिका से तकनीकी दूरी बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। टैरिफ की धमकियों ने वैश्विक साझेदारियों को हिला दिया है, और ईयू इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है।
डिजिटल दुनिया में अमेरिकी प्रभुत्व साफ दिखता है। यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड्स पर निर्भर है, जहां अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल का वर्चस्व है। एआई में भी ओपनएआई जैसी कंपनियां आगे हैं, जो यूरोप को कमजोर बनाता है।
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर अड़ी मांगें और टैरिफ नीतियां ईयू को सतर्क कर गई हैं। संसद की रिपोर्ट बताती है कि ईयू 80% से ज्यादा डिजिटल संसाधनों के लिए विदेशी स्रोतों पर आश्रित है।
कानून बनाने वाले अब देसी विकल्पों या अन्य स्रोतों पर जोर दे रहे हैं, गूगल-माइक्रोसॉफ्ट को दरकिनार करते हुए। लुंड यूनिवर्सिटी की जोहान लिंगार ने चेतावनी दी कि आरामप्रियता ने यूरोप को फंसा लिया है। सरकारी खरीद में रूढ़िवादी रवैया और जोखिम से परहेज ने स्थिति बिगाड़ी, जबकि अब भू-राजनीति अतिरिक्त खतरा पैदा कर रही है।
स्वतंत्र यूरोपीय तकनीकी ढांचे के लिए 300 अरब यूरो और 10 साल का समय लगेगा, जैसा बर्टेल्समैन का अनुमान है। चैंबर ऑफ प्रोग्रेस तो 5 ट्रिलियन यूरो की बात करता है। यह प्रयास ट्रंप युग में ईयू की स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।