नल्लामल्ला वनों के बीच आंध्र प्रदेश का श्रीशैलम मंदिर हिंदू धर्म का अनुपम रत्न है। 12 ज्योतिर्लिंगों में इकलौता ऐसा स्थान जहां मल्लिकार्जुन स्वामी के साथ भ्रामरांबा मां विराजमान हैं। यह शिव-शक्ति के एकाकार होने का जीवंत प्रमाण है।
भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर परिसर शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जहां मां ने मधुमक्खी अवतार में अरुणासुर नामक दैत्य का वध किया। राक्षस को ब्रह्मा से वरदान था कि उसे दो या चार पैर वाले प्राणी न मार सकें। उसने देवलोक पर आक्रमण कर दिया।
मां पार्वती ने भ्रामरांबा रूप धारण कर आठ पैरों वाली मधुमक्खी बनीं और राक्षस का अंत किया। मंदिर में मां को ब्राह्मणी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। गर्भगृह में अगस्त्य पत्नी लोपामुद्रा की प्रतिमा और श्री यंत्र है। भक्त रेशमी वस्त्र अर्पित करते हैं।
आकर्षक गोपुरम पर गणेश जी भक्तों के पाप-पुण्य गिनते हैं। परिसर में अनेक उप-मंदिर जैसे सहस्र लिंग, अर्धनारीश्वर, वीरभद्र आदि हैं। नंदी मंडप और वीरशिरोमंडप भव्य हैं।
श्रीशैलम की यात्रा हर भक्त के लिए जीवन बदलने वाली होती है, जो आध्यात्मिक शक्ति का भंडार है।