देश की आर्थिक नीतियों को मिली बड़ी सफलता: भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हो गया, जो हांगकांग, मलेशिया व इंडोनेशिया से अधिक है। बैंक ऑफ बड़ौदा के विश्लेषण ने इस प्रगति को प्रमाणित किया है।
केंद्र व राज्यों के मिले-जुले कर संग्रह इस आंकड़े के पीछे हैं, जो बेहतर प्रशासन और अनुपालन को प्रतिबिंबित करते हैं। केंद्र का हिस्सा 11.7 प्रतिशत रहने के बावजूद राज्यों ने संतुलन बनाया।
जर्मनी के 38% या अमेरिका के 25.6% से कमजोर स्थिति के बावजूद, युवा आबादी वाला भारत बड़ा अवसर देख रहा है। कर सुधारों में सरलीकरण व डिजिटल उपाय प्रमुख हैं।
आगामी आयकर अधिनियम 2025 व कॉर्पोरेट करों में ढील से अनुपालन आसान होगा। अप्रैल 2026 से प्रभावी यह व्यवस्था अनौपचारिक इकाइयों को मुख्यधारा में लाएगी।
समय के साथ कर वसूली जीडीपी वृद्धि से जुड़ रही है। आयकर प्रति व्यक्ति कमाई व अनुपालन पर निर्भर, कॉर्पोरेट कर लाभांशों से प्रेरित। यह रुझान भविष्य की मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत देता है।