‘मन की बात’ के ताजा एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईटानगर से बेंगलुरु तक फैली युवा स्वच्छता क्रांति की मिसालें पेश कीं। स्वच्छता को जीवन का मूल तत्व बताते हुए उन्होंने युवाओं के समर्पण पर गर्व जताया।
ईटानगर को सूर्य की पहली किरणों वाला शहर बताते हुए पीएम ने वहां के युवाओं के अभियान का वर्णन किया। गंदे स्थानों पर शुरू हुई सफाई नाहरलागुन से पासीघाट तक पहुंची और 11 लाख किलो कचरे का सफाया किया। यह प्रयास प्रेरणा स्रोत है।
नागांव, असम की ऐतिहासिक गलियों को साफ रखने का संकल्प लेने वाले लोगों का समूह बढ़ता गया। उन्होंने न केवल कचरा हटाया, बल्कि स्वच्छता का संदेश भी फैलाया।
बेंगलुरु के पुराने फर्नीचर कचरे को रीसायकल करने वाले पेशेवरों और चेन्नई के लैंडफिल प्रोजेक्ट्स ने दिखाया कि हर शहर में बदलाव संभव है।
मोदी जी ने अपील की कि स्वच्छता सभी की साझा जिम्मेदारी है। व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से गलियों, पार्कों या कचरा प्रबंधन में योगदान दें। ये छोटे प्रयास बड़े परिवर्तन लाएंगे और स्वच्छ भारत को वास्तविकता बनाएंगे।