भारतीय बैंकिंग जगत में हलचल मचाने वाली खबर: प्रमुख यूनियनों ने 27 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। मकसद साफ है- सभी शनिवार को छुट्टी देकर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना। यूएफबीयू ने नौ यूनियनों को एकजुट कर यह कदम उठाया।
26 जनवरी आधी रात से 27 जनवरी आधी रात तक चलेगी यह कार्रवाई, जिससे गणतंत्र दिवस के ठीक बाद बैंक सेवाएं ठप्प हो सकती हैं। शाखाएं बंद, लेन-देन रुकना और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रभावित होना तय है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी कर आईबीए, श्रम विभाग और वित्त मंत्रालय को सूचित किया गया। 2023-24 के समझौतों के बावजूद सरकारी मंजूरी न मिलने से नाराजगी चरम पर है। 2015 की आधी शनिवार छुट्टी से यात्रा जारी है, जिसमें यूनियनें कार्यभार बनाए रखने को तैयार हैं।
दैनिक 40 मिनट बढ़ाने का वादा कर यूनियनों ने लचीलापन दिखाया, फिर भी आश्वासनों पर अमल न होने से हड़ताल जरूरी हो गई। बैंक कर्मियों की थकान, डिजिटल चुनौतियां और परिवारिक संतुलन इस आंदोलन का मूल है।
सरकार और बैंकों से तत्काल प्रतिक्रिया की उम्मीद है। यदि नहीं, तो यह हड़ताल बैंकिंग सुधारों की दिशा बदल सकती है, कर्मचारी कल्याण को नई ऊंचाई देगी।