तमिलनाडु में भाषा शहीद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शहीदों की स्मृति में काला पहनावा ओढ़कर चेन्नई के थलामुथु-नटरासन स्मारक का दर्शन किया। हिंदी के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलनों में शहादत देने वालों को नमन करते हुए उन्होंने राज्य की भाषाई गरिमा का संकल्प दोहराया।
शहीदों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर स्टालिन ने नारा बुलंद किया- ‘भाषा शहीदों को सलाम’। एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘हिंदी को यहां कभी स्थान नहीं मिला। भाषा शहीद दिवस पर श्रद्धा: न पहले, न आज, न भविष्य में। भाषा के प्रति समर्पित तमिलनाडु ने थोपने के हर प्रयास का बहादुरी से जवाब दिया।’
इन संघर्षों ने भाषा आधारित पहचानों की रक्षा की। तमिल शहीदों को धन्यवाद। आगे कोई बलिदान न हो, तमिल जागरण अखंड रहे, हिंदी थोप को हमेशा ठुकराएंगे।
25 जनवरी को हर वर्ष स्मरण किया जाता है उन बलिदानियों का, जो 1930 के आंदोलनों व 1965 के जबरदस्त प्रदर्शनों में मारे गए। हिंदी से तमिल व क्षेत्रीय अधिकारों पर संकट का आभास हुआ था।
1965 का प्रदेशव्यापी हंगामा नीतियों पर असर डाल गया। केंद्र ने अंग्रेजी को हिंदी के समकक्ष रखने का वादा किया, जिससे विवाद शांत हुआ और बहुभाषावाद फला।
उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, मंत्री पीके सेकर बाबू, एमपी सामिनाथन, मेयर आर प्रिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, भाषा विवाद की जीवंतता प्रमाणित करते हुए।