तेजी से बदलती दुनिया में तनावग्रस्त जीवन, रातों की अनिद्रा और हमेशा की थकान ने सेहत को दांव पर लगा दिया है। स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग और नींद की कमी शरीर-मन को कमजोर कर रही है। लेकिन चिन्मय मुद्रा इस संकट का आसान समाधान प्रस्तुत करती है।
यह मुद्रा जागरूकता का प्रतीक है। अंगूठा-तर्जनी जोड़कर अन्य उंगलियां अंदर मोड़ें। आयुर्वेद के अनुसार, यह पंचतत्वों का संतुलन करता है। सांस पर ध्यान से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
तनाव कम होता है, चिंताएं दूर भागती हैं। रात में नींद गहरी और बिना रुकावट की आती है। एकाग्रता की क्षमता बढ़ने से पढ़ाई और काम में मन लगता है।
शारीरिक रूप से पाचन सुधरता है, भारीपन और गैस जैसी परेशानियां घटती हैं। समग्र ऊर्जा संतुलित होकर व्यक्ति को तरोताजा महसूस कराती है।
अभ्यास सरल है: आरामदायक आसन में बैठें, मुद्रा अपनाएं, आंखें बंद कर सांसों पर ध्यान दें। नियमितता से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होगा। चिन्मय मुद्रा सिद्ध करती है कि सरल तरीके से बड़ी सेहत समस्याओं का हल संभव है।