कोलकाता में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा विधायक देबजीत सरकार ने ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लिया और मुख्य चुनाव आयुक्त से जमीनी सत्यापन की मांग की। शनिवार को उन्होंने कहा कि दिल्ली के दफ्तर से आदेश न देकर बंगाल का दौरा करें।
बातचीत में देबजीत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘प्रदेश में हिंसा का माहौल है। सीईसी को उन स्थानों पर पहुंचना चाहिए। दूर से निर्देश व्यर्थ हैं जब कानून पूरी तरह ढह चुका है। यहां संवैधानिक मूल्यों की दुहाई कोई नहीं देता।’
टीएमसी की आलोचना में उन्होंने ईडी जांच के दौरान दस्तावेज छीनने की घटना का हवाला दिया। ‘मुख्यमंत्री के इशारे पर ऐसा हुआ। सत्तारूढ़ दल के नेता हिंदू विरोधी बयानबाजी कर रहे हैं। अब सीईसी और सुप्रीम कोर्ट टीम को आकर हकीकत समझनी चाहिए।’
अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा, ‘वर्चुअल बैठकें ही सही, क्योंकि पार्टी में उनके खिलाफ बगावत है। साथी उन्हें चोर कहते हैं। भौतिक सभाओं का लिहाज छोड़ दिया है। चुनावों में जनता टीएमसी को धूल चटा देगी, भाजपा सत्ता संभालेगी।’
राज्य में बढ़ते विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जहां चुनावी निष्पक्षता पर बहस छिड़ गई है।