सिंध प्रांत में कोल्ही किसान की गोली मारकर हत्या ने पाकिस्तान की असहिष्णु संस्कृति को नंगा कर दिया। स्थानीय जमींदार से भूमि विवाद के बाद हुई इस हत्या पर हिंदू समुदाय सड़कों पर उतर आया, हाईवे ब्लॉक कर न्याय मांगने लगा।
रिपोर्ट बताती है कि प्रांत में हिंसा का सिलसिला आरोप से शुरू होकर धार्मिक नेताओं की भड़काऊ भीड़, दंगों और हिंदू बस्तियों के उजाड़ तक पहुंच जाता है। दशकों से चली आ रही यह प्रथा सामंतवाद, धार्मिक पूर्वाग्रह और न्याय की कमी को उजागर करती है।
देश में हिंदुओं पर झूठे इल्जाम, किडनैपिंग, जबरन निकाह और हिंसा का सिलसिला जारी है। पंजाब में भी ऐसी घटनाएं होती हैं। सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के आंकड़े कहते हैं, 2021 से 2024 तक 421 नाबालिग सहित अल्पसंख्यक लड़कियों का धर्मांतरण जबरन कराया गया, अधिकांश हिंदू।
अगवा लड़कियों को इस्लाम कबूल कराने और शादी कराने के बाद परिवारों को कोर्ट में धमकियां और हार का सामना करना पड़ता है। बिना प्रभावी कानून के यह अपराध बढ़ते जा रहे हैं, हिंदू परिवार भय के साये में जी रहे हैं।
सरकार की निष्क्रियता और उग्रवाद की बढ़ोतरी ने अल्पसंख्यकों के लिए生存 का सवाल खड़ा कर दिया। सख्त कदमों की दरकार है।