रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों में ढील और सुधारों से भारत वर्ष 2035 तक निर्यात को 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक ले जा सकता है। मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास पर जोर देते हुए सरकार खर्च निर्भरता कम कर रही है।
यह पीएम मोदी का भारत को विश्व मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने का नवीनतम कदम है। 15 प्राथमिक क्षेत्र चुने गए हैं, जिसमें हाई-टेक सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर तक शामिल हैं।
व्यापार आसान बनाने से उत्पादन बढ़ेगा, निवेश आएगा और निर्यात प्रतिस्पर्धी बनेगा। दुनिया की अस्थिरता में भारत स्थायी वृद्धि का केंद्र बन रहा है। सप्लाई चेन चुनौतियों और तनावों के बीच भारत वैकल्पिक हब के रूप में स्थापित हो रहा है।
फिक्की सर्वे बताता है कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई। 91 प्रतिशत कंपनियों का उत्पादन स्थिर या बेहतर रहा, पिछले 87 प्रतिशत से सुधार। उद्योग विश्वास चरम पर, 86 प्रतिशत को अच्छे ऑर्डर की आशा। जीएसटी राहत ने बल दिया।
कंपनियों का टर्नओवर 3 लाख करोड़ से ऊपर, वित्तीय स्थिति मजबूत। ब्याज दरें औसतन 8.9 प्रतिशत और 87 प्रतिशत को फंडिंग उपलब्ध। यह प्रगति 2035 के लक्ष्य को वास्तविक बनाती है।