समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण को हथियार बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा। चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, धार्मिक राजनीति और नीतिगत विफलताओं की पोल खोली।
‘कालनेमि याद करने वाले कलियुग के राक्षस बताएं,’ अखिलेश ने व्यंग्य किया। धर्म का राजनीतिकरण हो रहा है। एसआईआर प्रक्रिया में दलों को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा? नोटिस की जानकारी क्यों छिपाई?
ईसी सरकार से सांठ-गांठ कर चुनाव बिगाड़ रहा। उपचुनाव में वोट चोरी, फुटेज छिपाई गई। बीएलओ प्रशिक्षण में हादसे, कोई कार्रवाई नहीं। मतदाता सूची में डुप्लीकेट, कन्नौज में 200 फर्जी वोट।
पारदर्शिता लाएं, आधार जोड़ें, डुप्लीकेट हटाएं। एसआईआर एनआरसी जैसा भ्रम पैदा कर रहा। एसपी शंकराचार्य से जुड़ी हुई, वे असली सनातनी—सरकार संवेदनशील बने।
जाति जनगणना में सभी को शामिल न करें तो क्या फायदा? एसपी का कन्नौज काऊ मिल्क प्लांट बंद, भाजपा का गौभक्ति नाटक। सपा राज में दूध वितरण होगा। नोएडा दुर्घटना में डायल-100 की लापरवाही, अफसरों पर एक्शन लें।
वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के आंकड़े जारी हों, अध्ययन हो। केजीएमयू पर- सरकार मजार हटाए तो संस्थान भी उखाड़ फेंके, ईसाई स्थापना है। अखिलेश का यह हमला चुनावी रणनीति का हिस्सा दिखता है।