12 फरवरी के बांग्लादेशी चुनावों को रोहिंग्या कैंपों से खतरा बताते खुफिया रिपोर्ट्स आईं, फिर भी पूर्ण लॉकडाउन ठुकराया गया। चुनाव आयोग की बजाय बहुस्तरीय सिक्योरिटी प्लान को हरी झंडी।
ढाका ट्रिब्यून के हवाले से कॉक्स बाजार कैंपों की विशालता व खराब सुविधाएं सीलिंग रोकती हैं। म्यांमार संकट से 2017 में आए शरणार्थी यहां ठप्प, कुछ भारत पहुंचे।
आयुक्त सनाउल्लाह का सील-बॉर्डर सुझाव चुनाव बचाने को था। टास्क फोर्स ने सुरक्षा चक्र पर सहमति जताई।
गृह मंत्रालय को रिपोर्ट: सील नामुमकिन, तोड़फोड़-फेक वोट-प्रचार-आर्म्स रिस्क। उपाय: कैमरा-वाल रिपेयर, रूट चेक, अरेस्ट, रेड्स, ड्यूटी, पार्टि वार्निंग।
12.77 करोड़ वोटरों के रजिस्टर में रोहिंग्या घुसपैठ चिंता। रिगिंग, बायस, झगड़े के शोर।
धर्मीकरण से कट्टरता बढ़ी, जन्नत-शरिया वादों ने उलझनें गढ़ीं।