रात की नींद के बाद सुबह उठते ही अगर मुंह खट्टा या कड़वा लगे, तो इसे हल्के में न लें। यह पेट के अम्ल की अधिकता का इशारा है, जो एसिड रिफ्लक्स का रूप ले चुका है।
आधुनिक चिकित्सा में इसे जीईआरडी कहा जाता है, जबकि आयुर्वेद पित्त असंतुलन का दोषी ठहराता है। पित्त बढ़ने से अम्लता होती है, जो पाचन के साथ-साथ शरीर के अन्य भागों को प्रभावित करती है।
देर से खाना, नशे की लत, लिवर डिसऑर्डर, मंद अग्नि और गलत डाइट इसकी जड़ें हैं। भूखे पेट रहना भी ट्रिगर करता है।
समाधान घर में ही है। त्रिफला चूर्ण रात को लें—यह डिटॉक्स करता है और पित्त संतुलित रखता है।
भोजन समयबद्ध रखें, रात का डिनर जल्दी करें, वॉक करें और बाएं ओर लेटें। बायीं करवट अम्ल को रोकती है। तांबे का जल अम्ल नाशक है।
सौंफ-मिश्री पाचन सहायक। स्ट्रेस कंट्रोल करें, वरना अम्ल तीन गुना हो जाता है।
स्वस्थ आदतें अपनाकर इस समस्या से मुक्ति पाएं। चिकित्सकीय सलाह जरूरी।