क्रिकेट के टी20 दौर में चेतेश्वर पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। गुजरात के राजकोट में पैदा हुए इस बल्लेबाज को पिता अरविंद ने क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं, जिनकी महत्वाकांक्षाएं बेटे के जरिए साकार हुईं।
2005 से सौराष्ट्र की ओर घरेलू क्रिकेट खेलते हुए 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू। राहुल द्रविड़ की तरह क्रीज पर दीवार बनने की उनकी काबिलियत ने उन्हें टीम का अभिन्न अंग बनाया।
विदेशी धरती पर उनकी वीरता कमाल की रही। 2018-19 ऑस्ट्रेलिया सीरीज में 521 रन बनाकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इंग्लैंड के खिलाफ 206*, दक्षिण अफ्रीका में 153, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध रांची की 202 रन की पारी अमर हैं। 2021 में सिडनी और ब्रिस्बेन की पारियां भी ऐतिहासिक।
103 मुकाबलों में 7195 रन, 43.60 का औसत, 19 शतक। काउंटी में भी धूम मचाई। 24 अगस्त 2025 को विदाई लेते हुए पुजारा ने साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट की आत्मा अभी जिंदा है।