हर बच्चे का शिक्षा का अधिकार है, जो राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र है। विश्व शिक्षा दिवस पर उन बॉलीवुड रचनाओं की बात जो सीखने की ललक जगाती हैं और व्यवस्था की कमियों को उजागर करती हैं।
आमिर खान की ‘तारे जमीन पर’ बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मक शिक्षा पर केंद्रित है। बोर्डिंग स्कूल में शिक्षक का साथ ईशान को नई जिंदगी देता है।
स्वरा भास्कर अभिनीत ‘नील बट्टे सन्नाटा’ मां-बेटी के संघर्ष को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। मां की शर्त—बेटी से बेहतर अंक लाना—शिक्षा के प्रति जज्बे को रेखांकित करती है।
‘चॉक एंड डस्टर’ दो अध्यापिकाओं विद्या-ज्योति की कहानी है। वे जुनूनी शिक्षण से छात्रों को प्रेरित करती हैं, व्यवस्था की खामियों से टकराती हैं।
शाहिद कपूर की ‘पाठशाला’ स्कूलों के कारोबारी रूप को चुनौती देती है। शिक्षक के रूप में वे छात्रों को एकजुट कर सत्य की लड़ाई लड़ते हैं।
2011 की ‘आई एम कलाम’ स्टार्स के बिना भी दिल जीत लेती है। राजस्थान के एक बच्चे का कलाम से प्रेरित सफर शिक्षा की शक्ति दिखाता है। ‘फालतू’, ‘आरक्षण’, ‘कोटा फैक्ट्री’ जैसी फिल्में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का हथियार बनाती हैं। ये हमें याद दिलाती हैं कि सच्ची शिक्षा सीमाओं से परे होती है।