पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तापमान बढ़ा जब विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को SIR के दौरान TMC कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी पर नरम रवैया अपनाने का दोषी ठहराया। मसौदा वोटर लिस्ट पर आपत्तियों की सुनवाई स्थलों पर हो रही घटनाओं ने यह विवाद जन्म दिया है।
शुक्रवार को प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘विज्ञप्तियां जारी करना काफी नहीं। जनता को आयोग से सख्त कदम चाहिए। अब कार्रवाई करो, बातें बंद करो।’ CAPF तैनाती न होने पर उन्होंने आयोग की संवैधानिक शक्तियों की याद दिलाई- केंद्रीय फोर्स या सेना बिना पूछे लगाई जा सकती है।
भाजपा नेता सामिक भट्टाचार्य ने पहले भी ऐसी शिकायतें की थीं और CEC से स्थिति जांचने की अपील की थी।
विधानसभा चुनावों से पहले अधिकारी ने अल्पसंख्यकों के वोटिंग ट्रेंड पर कहा, ‘वे भाजपा को न चुनें तो ठीक, लेकिन TMC को भी इस बार ठुकराएंगे।’ यह टिप्पणी ममता बनर्जी की पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।
पुनरीक्षण अभियान के बीच आयोग पर दबाव बढ़ रहा है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है, वरना लोकतंत्र पर सवाल उठेंगे।