चीन ताइवान को अपने कब्जे में लेने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ग्लोबल ताइवान इंस्टीट्यूट के अनुसार, पीएलए 2027 तक आक्रमण की पूर्ण क्षमता हासिल कर लेगी और उसके आसपास बड़े ऑपरेशन शुरू कर सकती है। यह आशंका वेनेजुएला जैसे मामलों से तुलना में व्यक्त की गई है।
जीटीआई डायरेक्टर जॉन डॉटसन ने वॉशिंगटन पैनल में पीएलए के हालिया अभ्यासों का विश्लेषण किया। ताइवान के मुख्य द्वीप के पास कोस्ट गार्ड की तैनाती से चीन अपने कदमों को ‘कानून प्रवर्तन’ बता सकता है। 2025 का ‘जस्टिस मिशन’ बढ़ते दबाव का प्रतीक है।
एन कोवालेवस्की ने 2026 को महत्वपूर्ण वर्ष बताया, जब चीन की सैन्य शक्ति चरम पर पहुंचेगी। उन्होंने ताइवान और अमेरिका से अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की अपील की। पूर्व अमेरिकी कमांडर एडमिरल फिलिप डेविडसन की 2021 चेतावनी दोहराई गई, जिसमें शी जिनपिंग के 2027 निर्देश का उल्लेख है।
चीन ताइवान के राष्ट्रपति या अमेरिकी हथियार सौदों को दोषी ठहराता है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये बहाने हैं। इस महीने ताइवान ने साइबर अटैक, प्रोपेगैंडा और हैकिंग की शिकायत की। रिपोर्ट में 799 फर्जी अकाउंट्स उजागर हुए, जो रक्षा विश्वास को कमजोर कर रहे हैं।
ये कार्रवाइयां चीन की हाइब्रिड रणनीति को दर्शाती हैं। ताइवान को मजबूत सहयोग और तैयारी से खतरे का सामना करना होगा, वरना क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।