एनसीपी के दिग्गज नेता छगन भुजबल को एक और कानूनी राहत मिली है। मुंबई की अदालत ने ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें और अन्यों को डिस्चार्ज कर दिया। एंटी करप्शन ब्यूरो के फैसले के बाद ईडी का मामला भी खत्म।
जज सत्यनारायण नवंदर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रेडिकेट ऑफेंस न बनने पर ईडी का पीएमएलए केस टिक नहीं सकता। याचिकाएं मंजूर कर ईडी की जांच रद्द कर दी गई।
साल 2005 में भुजबल के मंत्री काल में दिल्ली महाराष्ट्र सदन का ठेका चमनलाल एंटरप्राइज को बिना बोली के देने का विवाद शुरू हुआ। परिवार की कंपनियों को फायदा पहुंचाने और 13.5 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप लगा।
2015 में ईडी ने पीएमएलए के दो केस दर्ज किए। समीर भुजबल, पंकज सहित 52 नाम शामिल। मार्च 2016 में पूछताछ और गिरफ्तारी के बाद भुजबल को 2018 तक जेल में रहना पड़ा।
वकीलों का मानना है कि मूल केस समाप्त होने से ईडी की नींव हिल गई। महाराष्ट्र सदन घोटाला अब पूरी तरह बंद। एनसीपी में उत्साह है, भुजबल की राजनीतिक जमीन मजबूत हुई।
यह फैसला प्रवर्तन एजेंसी को सबक सिखाता है। राजनीतिक मामलों में सतर्कता बरतनी होगी। भुजबल की लंबी कानूनी लड़ाई रंग लाई, अब नई शुरुआत का समय है।