वापी, एशिया की प्रमुख औद्योगिक बस्ती, केंद्रीय बजट पर भरोसा लगाए है। केमिकल, फार्मा, पेपर समेत 10 हजार उद्योग ट्रंप टैरिफ के दबाव में हैं। विदेशी मुद्रा अर्जन करने वाले ये कारोबार सरकारी समर्थन की प्रतीक्षा में हैं।
सतीश पटेल, वापी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन प्रमुख, बोले कि एमएसएमई वाले इस क्षेत्र को बजट से ट्रंप प्रभाव पर काबू पाने के उपाय चाहिए। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के सपने को साकार करने वाली उद्योग-हितैषी नीतियां अपेक्षित हैं।
प्रकाश भद्रा ने बताया कि आरएंडडी पर पुरानी 200 फीसदी रिबेट वापस लाई जाए, जिससे नवाचार बढ़े। एआई निवेश, टैरिफ-चीन चुनौतियों पर सब्सिडी जरूरी। एमएसएमई उत्पादन पटरी पर लौटे।
फार्मा में भारत का गौरव वापी से जुड़ा है। कमल वशी ने फार्मा विभाग बनाने, निर्यात प्रतिनिधित्व बढ़ाने और जीएसटी प्रक्रिया आसान करने की मांग की। वन विंडो व्यवस्था से व्यापार सरल होगा।
नीतिगत सुधारों से बजट उद्योगों को नई दिशा देगा। वैश्विक बाजार में टिकने के लिए ये राहत वापी को मजबूत बनाएंगी।