जापान की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शुक्रवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स भंग कर 8 फरवरी के लिए मध्यावधि चुनाव की तारीख तय कर दी। छह दशकों में सत्रारंभ पर ऐसा कदम अनोखा है।
चुनाव का मुख्य मुद्दा महंगाई है। सत्ताधारी खाद्य वस्तुओं पर कंजम्प्शन टैक्स सस्पेंड करना चाहते हैं, विपक्षी खेमे इसे सभी चीजों पर हटाने की बात कर रहे। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के गुप्त निधि कांड ने धन-राजनीति को सुर्खियों में ला दिया। पर्यटकों व विदेशी बाशिंदों से संबंधित विवाद भी वोटरों का ध्यान खींच सकते हैं।
अक्टूबर 2025 से सत्ता में ताकाइची को जनादेश की पुष्टि चाहिए। कैबिनेट रेटिंग मजबूत होने पर भी संसदीय बहुमत नगण्य। विपक्ष का समर्थन बिना कोई बिल पारित नहीं।
विपक्षी नेता ताकाइची पर वित्त वर्ष 2026 के बजट टालने का इल्जाम ठोक रहे। राजनीति को प्राथमिकता देने का तंज कस रहे।
ताकाइची का करियर प्रेरणादायक। 1993 में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं। एलडीपी में शामिल हो आबे कैबिनेट में ओकिनावा मंत्री बनीं। नीति परिषद की पहली महिला चेयर, आर्थिक सुरक्षा प्रमुख, आंतरिक मंत्री में रिकॉर्ड। 2024 में कोइजुमी को पछाड़ एलडीपी प्रमुख।
अभियान तेज हो चुका। आर्थिक चुनौतियों के बीच ताकाइची की किस्मत का फैसला मतदाता करेंगे।