मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने इसे मां सरस्वती का स्थायी मंदिर बताते हुए कहा कि यहां शांतिपूर्वक पूजन की परंपरा बरकरार रहनी चाहिए। हिंदू कभी अपने धर्म में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेंगे।
कोर्ट के अंतरिम आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, अदालत संवैधानिक संस्था है, सम्मानजनक है। लेकिन यह स्थायी हल नहीं, सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है जिससे दोनों पक्ष अपनी धार्मिक क्रियाएं कर सकें। पराधीन काल में मंदिरों का अपमान हुआ, आज वक्त है उसका सुधार।
साध्वी ने ऐतिहासिक अन्याय का जख्म खोला। मुगलों ने मंदिरों पर मस्जिदें खड़ी कीं, हिंदुओं को दबाया। अब समाज जाग चुका है, बदला नहीं, बल्कि सम्मान वापस लाना चाहता है। कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उसने दशकों तक हिंदू भावनाओं की अनदेखी की।
उन्होंने मांग की कि मंदिर को पूर्ण स्वतंत्रता मिले। स्वतंत्र भारत में सभी को पूजा का अधिकार है, लेकिन हिंदू परंपराओं में दखलंदाजी अस्वीकार्य। यह बयान हिंदू एकजुटता को मजबूत करता है, जो ज्ञानवापी, मथुरा जैसे मामलों में भी दिख रही है। न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।