अमेरिका में राजनीतिक तूफान उठा है। डेमोक्रेट सांसद बेका बैलिंट और भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल ने मेटा व गूगल के मुखियाओं को कड़े पत्र भेजे। आईसीई के श्वेत राष्ट्रवादी रंग वाले विज्ञापनों को हटाने और डीएचएस से सारे रिश्ते तोड़ने की मांग की गई है। ये विज्ञापन भर्ती अभियान के नाम पर चला रहे हैं।
शिकागो से न्यू ऑरलियन्स तक हजारों एजेंट भर्ती का लक्ष्य। नियम शिथिल—बिना उम्र बैंड, भारी बोनस और कम ट्रेनिंग। इंस्टाग्राम पर लैटिन संस्कृति प्रेमियों को ‘हमारा घर फिर हमारा’ स्लोगन दिखाकर दबाव बनाया जा रहा। यह नारा चरमपंथियों का है।
खर्च का आंकड़ा चौंकाने वाला—90 दिनों में 10 लाख डॉलर स्व-निर्वासन पर, 30 लाख स्पेनिश गूगल विज्ञापनों पर। सालाना 58 लाख का कुल निवेश। सांसद पूछ रहे हैं—आपकी एंटी-हेट पॉलिसी का क्या हुआ? अनुबंध विवरण दें।
यह टकराव टेक्नोलॉजी और सरकार के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है। आईसीई की ये रणनीति प्रवासी समुदायों पर मनोवैज्ञानिक असर डाल रही। कंपनियों को अब सफाई देनी होगी कि कंटेंट चेक कैसे फेल हुआ।
इससे इमिग्रेशन प्रवर्तन पर बहस तेज हो गई है। सांसदों की मांग से विज्ञापन नीतियों में सख्ती आ सकती है, जो भविष्य के सरकारी कैंपेन प्रभावित करेगी।