पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद किया जाता है, जिनके साहस ने आजादी की राह प्रशस्त की। उनका INA गठन और प्रेरक नारा युवाओं में जोश भरता है।
उनके रहस्यमयी जीवन पर कई निर्माण हुए हैं।
‘गुमनामी’ (2019) गुमनामी बाबा के रूप में नेताजी की कहानी बुनती है, जिसमें प्रोसेनजीत और अनिरुद्ध भट्टाचार्य चमकते हैं।
‘बोस: डेड/अलाइव’ रहस्य की गहराई में उतरती है, राजकुमार राव के साथ।
‘अमी सुभाष बोलची’ में मिथुन नेताजी के विचारों से प्रेरणा लेते हैं।
‘द फॉरगॉटन हीरो’ द्वितीय विश्व युद्ध के प्रसंगों को विस्तार से दिखाती है।
बंगाली धारावाहिक ‘नेताजी’, पुरानी फिल्में ‘सुभाष चंद्र’ व ‘समाधि’ उनके प्रारंभिक संघर्ष प्रस्तुत करती हैं।
ये सभी नेताजी के पराक्रम को जीवंत बनाती हैं, राष्ट्रभक्ति सिखाती हैं।