सूर्यापेट के पलामरी में बसा श्री ब्रह्मा सरस्वती मंदिर काकतीय शिल्पकला का अनमोल रत्न है। एक ही शिलाखंड से तराशी गई ब्रह्मा व मां सरस्वती की प्रतिमा विश्वविख्यात है। 12वीं सदी में गणपतिदेव के शासनकाल में रामिरेड्डी व बेथिरेड्डी ने इसका निर्माण कराया। बसंत पंचमी पर भक्त दूर-दूर से संयुक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पीले बस्त्रों से सुसज्जित मां सरस्वती की पूजा होती है। अक्षराभ्यास की रस्म से बालक-बालिकाएं विद्या की ओर कदम रखते हैं। स्वर साधकों को मां की साड़ी भेंट की जाती है, जो संगीत भक्ति को सम्मानित करती है। मंदिर बच्चों की पढ़ाई व सेहत सुधारने में सहायक माना जाता है।
काकतीय युग की बारीक नक्काशी प्रतिमा में सांस फूंकती है। पर्व पर विशेष यज्ञ व भजन से माहौल दिव्य हो जाता है। यह मंदिर आस्था व कला का संगम है, जो नई पीढ़ी को प्रेरित करता रहता है।