भारतीय सेबी के चीफ तुहिन कांत पांडे ने ओसाका में सीआईआई बैठक के दौरान घरेलू निवेशकों के अभूतपूर्व उभार को देश के शीर्षस्थ घटनाक्रमों में गिना। वैश्विक बाजारों में व्यापार व भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी भारत आर्थिक मोर्चे पर अडिग खड़ा है।
कॉरपोरेट्स अब भारी फंडिंग आसानी से हासिल कर रहे हैं। वर्ष 2025 में आईपीओ गिनती में भारत शीर्ष पर तथा पूंजी संग्रह में तीसरे पायदान पर रहा। घटती महंगाई, प्रबल एफईआर और मजबूत बाहरी हिसाब-किताब भारत को दुनिया की तेजतर्रार अर्थव्यवस्था बनाते हैं।
भारत का डिजिटल ढांचा वैश्विक स्तर पर मानदंड गढ़ रहा है। जीएसटी उन्नयन, लेबर कोड रिन्यूअल और टैक्स राहत खपत-निवेश चक्र को पुनर्जनन दे रहे हैं। मार्केट कैप हिस्से से भारत इक्विटी में पांचवें नंबर का है।
एमएफ की जड़ें गहरी हो रही हैं, एसआईपी इक्विटी में वृद्धि हो रही है। एआईएफ प्राइवेट कैपिटल का धुरी हैं। डेट मार्केट फैल रहे हैं, पीई/एआईएफ बहाव तेज, रीयिट/इनविट्स अवसंरचना-प्रॉपर्टी में स्थायी फंड्स आकर्षित कर रहे। म्यूनिसिपल बॉन्ड्स गति पकड़ चुके।
सेबी निवेशक जागरूकता, साइबर फ्रॉड पर रोक और नैतिक निवेश पर जोर दे रहा है। एफपीआई को रेगुलेटरी ईज, रजिस्ट्रेशन सिम्प्लिसिटी, सेटलमेंट सुधार और ग्लोबल कनेक्ट से लाभ। यह ट्रेंड भारतीय बाजारों को वैश्विक लीडर बनाएगा।