बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में मंगलवार को सरकारी कर्मचारियों पर पुलिस की कार्रवाई ने हंगामा मचा दिया। बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने शिक्षकों व प्रोफेसरों की गिरफ्तारियों को शर्मनाक बताते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों की जमकर खिंचाई की है।
डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस लागू करने की मांग पर बलूचिस्तान ग्रैंड एलायंस के बुलावे पर प्रदर्शनकारी रेड जोन की ओर बढ़े, लेकिन सोमवार रात ही प्रमुख रास्तों पर कंटेनर लगा दिए गए। प्रेस क्लब परिसर में शरण लेने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर दर्जनों को पकड़ लिया।
एक प्रोफेसर को सड़क पर खींचे जाने का वीडियो वायरल होने से आक्रोश चरम पर है। बीएसएसी ने कहा, ‘यह पुलिस का कुकृत्य है जो शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुंचाता है। हम इसे शिक्षक अपमान की पराकाष्ठा मानते हैं।’
प्रांत में शांतिपूर्ण विरोध अब अपराध का रूप ले चुका है, जहां बेगुनाहों को सजा मिल रही है, संगठन ने आरोप लगाया। सरकार के सुशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बीएसएसी ने हिंसा का विरोध करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और अपराधी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की अपील की।
घटना के दौरान इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं, जिसने हालात बिगाड़े। बलूचिस्तान भर से जुटे कर्मचारियों को रोका गया। विरोध में ग्रैंड एलायंस ने ‘जेल भरों’ आंदोलन की चेतावनी दी है।
सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के आंदोलन तेज हो रहे हैं। मानवाधिकार समूह पाकिस्तान की कठोरता पर सवाल उठा रहे हैं, जो बलूचिस्तान के अस्थिर हालात को और जटिल बना सकता है। समय रहते संवाद जरूरी है।