कर्नाटक के संयुक्त विधानमंडल सत्र में राज्यपाल थावरचंद गहलोत का संक्षिप्त संबोधन राजनीतिक भूचाल ला गया। सरकार के तैयार लंबे भाषण को नजरअंदाज कर उन्होंने सीमित बातें कही और अचानक समापन घोषित कर दिया। विधानसभा परिसर में कांग्रेस का हंगामा भड़क उठा, जबकि भाजपा ने समर्थन जताया।
यह घटना राज्यपाल और कांग्रेस सरकार के तनाव को चरम पर ले गई। स्पीकर की कुर्सी से उतरते ही कांग्रेस विधायकों ने नारे लगाए। बीजेपी ने ‘भारत माता की जय’ से जवाब दिया। एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद ने राज्यपाल से सीधे सवाल किया, जिसके लिए मार्शलों की जरूरत पड़ी।
सत्र से पहले अनुपस्थिति की चर्चा थी, लेकिन राज्यपाल समय पर आए। सीएम सिद्धारमैया ने स्वागत किया। सीएम ने इसे संविधान का अपमान बताते हुए अदालत जाने की बात कही। अनुच्छेदों का जिक्र कर उन्होंने राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाई।
मंत्री पाटिल की पूर्व चेतावनी साकार हो गई। भाषण से केंद्र सरकार की योजनाओं पर हमलावर पैराग्राफ हटाए गए थे। बुधवार की बैठक बेनतीजा रही। कर्नाटक में अब संवैधानिक संकट गहरा सकता है, जो राज्य की सियासत को प्रभावित करेगा।