रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ रहा है, जो दर्द और अक्षमता लाता है। आयुर्वेद इसे वात विकृति से जोड़ता है, जहां डिस्क खिसककर नसों दबाती हैं। लक्षणों में पैरों में सुन्नपन, कमजोरी शामिल है।
कारण जीवनशैली से जुड़े हैं—कंप्यूटर पर घंटों बैठना, गलत मुद्रा में सामान उठाना। मोटापा भार बढ़ाता है, उम्र डिस्क सुखाती है, चोटें बिगाड़ देती हैं। मांसपेशियां कमजोर होने से सहारा कम होता है।
रोकथाम के उपाय अपनाएं। बैठने के बीच में चलें-फिरें। योग जैसे भुजंगासन, शवासन अभ्यास करें। तिल तेल मालिश, गर्म फेरमेंटेशन लाभकारी। आहार में गर्म, तैलीय पदार्थ रखें, ठंडा-पतला त्यागें।
नियमित प्राणायाम वात नियंत्रित रखता है। आयुर्वेद समग्र उपचार देता है—दर्द निवारण के साथ शारीरिक मजबूती। इन सुझावों से पीठ दर्द मुक्त जीवन संभव है। विशेषज्ञ परामर्श जरूरी।