देश में बेटियों के सशक्तिकरण की मुहिम के साथ बॉलीवुड ने भी कदम मिलाया। 2014 के बाद रिलीज फिल्मों ने हीरोइनों को ताकतवर बनाया, जो अपराध, हिंसा और मानसिक चुनौतियों से लड़ती हैं।
मर्दानी फ्रेंचाइजी की शुरुआत रानी मुखर्जी की 2014 फिल्म से हुई, जहां शिवानी अपराधियों का सफाया करती है। गोपी पुथरान ने फेमिनिस्ट थ्रिलर बनाया, जिसका तीसरा भाग आ रहा है।
हिचकी में रानी की नैना ने बीमारी के बावजूद बच्चों को पढ़ाया। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने जागरूकता वाली ड्रामा रची।
डियर जिंदगी में आलिया की कायरा ने खुद को खोजा, शाहरुख के मार्गदर्शन में। गौरी शिंदे ने भावुक संदेश दिया।
मेघना गुलजार की राजी में आलिया सहमत बनीं, पाकिस्तान में जासूसी कर देश सेवा की।
अनुभव सिन्हा के थप्पड़ ने तापसी के जरिए घरेलू हिंसा उजागर किया, महिलाओं को हक दिलाया।
केरल स्टोरी में अदा शर्मा ने शालिनी के रूप में कट्टरता से जूझने की कहानी कही। सुदीप्तो सेन ने सच्चाई दिखाई।
इन फिल्मों ने समाज को झकझोरा, महिलाओं की आवाज बुलंद की।