फिक्की के प्री-बजट सर्वे से साफ है कि भारत इंक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 2026-27 में 7-8 प्रतिशत की विकास दर की उम्मीद कर रहा है। नई दिल्ली से जारी इस रिपोर्ट में 80 प्रतिशत उद्योग प्रतिनिधियों ने आर्थिक भविष्य पर भरोसा जताया।
50 प्रतिशत को अगले वर्ष जीडीपी वृद्धि 7-8% के बीच दिख रही है, जबकि 42 प्रतिशत वर्तमान राजकोषीय घाटे के 4.4% लक्ष्य को हासिल मानते हैं। यह सरकारी नीतियों पर विश्वास का प्रमाण है।
बजट की तीन मुख्य मांगें: नौकरियां बढ़ाना, इंफ्रा विकास तेज करना, निर्यात समर्थन मजबूत करना। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, एमएसएमई फोकस क्षेत्र। पूंजीगत खर्च और उत्पादन पर लगातार ध्यान जरूरी।
इलेक्ट्रॉनिक्स मेगा क्लस्टर से बड़े पैमाने का विस्तार संभव। रक्षा में 30% कैपेक्स हिस्सा, ड्रोन, एंटी-ड्रोन, ईडब्ल्यू, एआई आधुनिकीकरण। ड्रोन पीएलआई 1000 करोड़ और 1000 करोड़ आरएंडडी फंड प्रस्तावित।
निर्यात बाधाओं – टैरिफ, सीबीएएम – पर काबू के लिए कस्टम्स सरलीकरण, लॉजिस्टिक्स-पोर्ट सुधार, प्रोत्साहन-रिफंड मजबूती। टैक्स सुधारों में डिजिटल अनुपालन, निश्चितता, तेज विवाद निपटारा, कम मुकदमे, कॉर्पोरेट सुगमता।
सर्वे बताता है कि उद्योग संतुलित बजट चाहता है जो विकास को रफ्तार दे, रोजगार पैदा करे, प्रतिस्पर्धा बढ़ाए और भारत को वैश्विक चेन में मजबूत करे, राजकोषीय अनुशासन के साथ।