सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा देने के पारंपरिक तरीके फांसी को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस समाप्त कर दी है। सुनवाई के बाद फैसला आरक्षित कर लिया गया, जिससे कानूनी हलकों में उत्सुकता बढ़ गई है।
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर इस याचिका में फांसी को पुरातनपीठ्य और यातनादायक करार दिया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि फांसी में दोषी को घुटन और दर्द से जूझना पड़ता है। इसके विकल्प में जहर का इंजेक्शन सुझाया गया, जो अमेरिका सहित कई देशों में प्रचलित है और तुरंत असर करता है। दोषी को अपनी पसंद चुनने का अधिकार देने की बात कही गई।
केंद्र सरकार ने पक्ष रखते हुए कहा कि वैकल्पिक विधियों पर समिति अध्ययनरत है, लेकिन फांसी को कानूनी रूप से सबसे भरोसेमंद माना जा रहा है। अटॉर्नी जनरल ने इसे बदलने के खिलाफ दलीलें दीं।
अदालत ने केंद्र की आनाकानी पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने जोर दिया कि भारतीय संविधान दया और मानवता पर आधारित है। समय के साथ दंड विधियों में सुधार जरूरी है, जिसमें पीड़ाहीन मौत भी शामिल हो।
याचिका लंबे समय से लंबित थी। अब तीन हफ्ते में अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि भारत में सैकड़ों कैदी मौत की सजा काट रहे हैं। फैसला आने पर दंड व्यवस्था में नया दौर शुरू हो सकता है।