दावोस में विश्व आर्थिक मंच के मंच पर तकनीक जगत के दिग्गजों ने भरोसा दिलाया कि एआई रोजगार छीनने वाला नहीं, बल्कि कार्यशैली बदलने वाला साबित होगा। यह विशिष्ट कार्य संभालेगा, पूरी नौकरी नहीं।
कियान गोहर ने सटीक शब्दावली पर बल दिया। ‘एआई को साथी न मानें, यह सीमित क्षमता वाला है। इंसान बहुआयामी होते हैं।’
महामारी जैसे पूर्वानुमान झूठे निकले।
मुंजाल शाह ने कल्पना की- दुनिया में 8 अरब मनुष्य, 80 अरब एआई। यह संयोजन उत्पादकता बढ़ाएगा।
तेज गर्मी में एआई ने हजारों को चेतावनी देकर जान बचाई। ‘आत्म-परीक्षण वाले सिस्टम भरोसेमंद बनाते हैं।’
केट कैलॉट ने चेताया, एआई में नैतिक बोध नहीं। यह औजार मात्र है।
क्रिस्टोफ श्वाइजर बोले, एआई के साथ काम टीमवर्क जैसा। कंपनियां जो प्रक्रियाएं बदलेंगी, वही जीतेंगी।
एनरिक लोरस ने एचपी के अनुभव साझा किए- एआई ने ग्राहक सेवा बेहतर की।
दावोस से सीख: एआई को अपनाकर भविष्य संवारा जा सकता है।