फिटनेस का जमाना है। हर तरफ जिम, डाइट प्लान, ऑर्गेनिक फूड्स की धूम। फिर भी लाखों लोग हेल्दी खाने के बावजूद वजन कंट्रोल नहीं कर पा रहे। आखिर क्यों?
कारण डाइट से परे है। आयुर्वेद अग्निमंडल पर जोर देता है—वही है जीवन का ईंधन। साइंस इसे मेटाबॉलिक रेट कहती है। कमजोर अग्नि से गुणवत्ता भोजन भी अनावश्यक चर्बी बन जाता है।
गलत धारणा: हेल्थ फूड मतलब बेफिक्र खाना। ड्राई फ्रूट्स, देशी घी, गुड़-शहद, नट बटर्स, एवोकाडो—ये भारी हैं। पचाने में वक्त लगता है, कैलोरी हाई। बैलेंस बिगड़ा, तो वजन ऊपर।
हेल्थ प्रोडक्ट्स के जाल में फंसें। कम फैट वाले प्रोडक्ट्स, होल ग्रेन स्नैक्स, बार्स—चीनी भरी पड़ी है। कफ बढ़ता है, इंसुलिन रिएक्ट करता है, फैट स्टोरेज शुरू।
हार्मोन खेल रहे हैं। थायरॉइड ठप्प, पीसीओएस, टेंशन—दोष असंतुलन से मेटाबॉलिज्म ब्रेक। कम खाओ, ज्यादा जमा हो।
अधूरी नींद अग्नि दबाती है। भूख का हार्मोन चढ़ता है, संतुष्टि का घटता। बिना जरूरत खाना खाते रहो।
बढ़ती उम्र, बैठे रहना—मसल कम, कैलोरी बर्न कम। मूवमेंट जरूरी।
उपाय सरल: पाचन मजबूत करें, प्रोसेस्ड से दूर, हार्मोन चेक, 7-8 घंटे सोएं, रोज व्यायाम। वजन घटाना सिस्टम का खेल है।