आधुनिक जीवनशैली ने हमें थका दिया है—लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, अनियमित भोजन और तनावपूर्ण दिनचर्या। नतीजा? पेट संबंधी विकार, गैस बनना, जोड़ों का दर्द और मानसिक अशांति। आयुर्वेद के अनुसार, वायु दोष का बढ़ना इन सबका मूल कारण है।
वायु मुद्रा से इस दोष को नियंत्रित किया जा सकता है। तरीका आसान: सहज आसन में विराजें, नेत्र बंद करें। तर्जनी अंगुलि को मोड़कर अंगूठे के नीचे दाबें, शेष उंगलियां सीधी। श्वास सामान्य रखें। प्रतिदिन 15-20 मिनट का अभ्यास, विशेषकर प्रातःकाल खाली उदर पर।
तुरंत असर नसों पर पड़ता है—चिंता, बेचैनी घटती है। पाचन क्रिया सक्रिय होती है, गैस और सूजन समाप्त। बेहतर रक्त संचार जोड़ों को लचीलापन देता है, साइटिका जैसी समस्याओं में राहत।
यह प्राचीन विधि बिना दवा के स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करती है। अपनाएं और अनुभव करें चमत्कार।