उत्तराखंड के ऋषिकेश में गीता प्रेस के ‘कल्याण’ पत्रिका के 100 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने संबोधन में स्पष्ट किया कि सनातन धर्म का बचाव चीख-पुकार से नहीं, बल्कि शास्त्रार्थ और युक्तिवाद से होगा। सीएम धामी के साथ आयोजन में शाह ने गंगा-मंदिर पूजन भी किया।
गीता प्रेस को विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति का ध्रुवतारा बताते हुए शाह ने पोद्दार जी के 103 वर्षीय योगदान को सराहा। उन्होंने भक्तों को मोक्ष पथ दिखाया और संस्कृति के प्रति हृदयों में अटूट विश्वास जगाया।
‘कल्याण’ की शताब्दी दुर्लभ है; यह सदा धर्मनिष्ठ रहा। गीता प्रेस ने चार पीढ़ियों तक प्राचीन ग्रंथों को अपरिवर्तित रूप में आमजन तक पहुंचाया।
औपनिवेशिक काल में धर्मनिंदा के दौर में ‘कल्याण’ ने शांतिपूर्ण ज्ञान-प्रकाश फैलाया। शाह बोले, वैचारिक आक्रमणों का जवाब तर्क-शास्त्र से दें। गीता प्रेस का फोकस विचारों पर रहा, धन-प्रचार पर नहीं।
ज्ञानरूपी शब्द ही सभ्यताओं का आधार हैं। मोदी युग में अयोध्या राम मंदिर और काशी कॉरिडोर श्रद्धा की विजय के प्रतीक हैं।
शाह के उद्गार सनातन रक्षा की नई दिशा सुझाते हैं।