वर्तमान वैश्विक संकटों के बीच वुडरो विल्सन का ‘पीस विदआउट विक्ट्री’ सिद्धांत प्रेरणा स्रोत है। 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के चरम पर सीनेट को संबोधित करते हुए उन्होंने जीत-हार की पुरानी परंपरा को चुनौती दी। यूरोप के मैदान खून से लाल थे, और युद्ध थमने का नाम न ले रहा था।
विल्सन का मानना था कि विजय आधारित शांति में हारी हुई पक्ष की असंतुष्टि भविष्य के संघर्षों को जन्म देगी। सभी देशों को समान सुरक्षा और गरिमा वाली शांति ही सच्ची होगी। ब्रिटेन-फ्रांस जैसे सहयोगी जर्मनी की सजा चाहते थे, लेकिन विल्सन का नैतिक दृष्टिकोण अलग था।
इस भाषण ने 14 पॉइंट्स का आधार तैयार किया, जिसमें समुद्रों पर स्वतंत्रता, हथियारों में कटौती, और राष्ट्र संघ जैसे विचार थे। हालांकि अमेरिका ने लीग जॉइन नहीं किया, लेकिन ये सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचे।
विल्सन ने साबित किया कि शांति बलपूर्वक नहीं, पारस्परिक सम्मान से आती है। द्वितीय विश्व युद्ध ने उनकी दूरदृष्टि की पुष्टि की। आज के दौर में यह संदेश युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक बना हुआ है।