स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एआई पावर प्ले’ चर्चा में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत को एआई क्रांति का नेतृत्वकर्ता घोषित किया। उन्होंने अनुप्रयोगों से लेकर ऊर्जा तक एआई के सभी पांच चरणों में देश की उल्लेखनीय उपलब्धियों का जिक्र किया।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई का असली मूल्य वास्तविक अनुप्रयोगों से आता है, न कि सबसे बड़े मॉडल विकसित करने से। 20-50 अरब पैरामीटर वाले मॉडल 95 प्रतिशत व्यावहारिक जरूरतों को पूरा कर लेते हैं।
भारत ने कम खर्चीले एआई उपकरण गढ़े हैं, जो उद्योगों, कृषि और स्वास्थ्य में क्रांति ला रहे हैं। यह रणनीति अधिकतम लाभ के साथ न्यूनतम लागत पर जोर देती है।
वैश्विक रैंकिंग पर टिप्पणी करते हुए स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें भारत तीसरे स्थान पर है एआई तैयारी में और दूसरे पर प्रतिभा घनत्व में। जीपीयू पहुंच की बाधा दूर करने को 38,000 यूनिट वाली सब्सिडी वाली राष्ट्रीय सुविधा शुरू की गई है।
10 मिलियन लोगों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम आईटी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा। अंत में, भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भविष्यवाणी की।