देश के सबसे बड़े बाघ भंडार वाले मध्य प्रदेश में 2025 में 55 बाघों की मौत हुई, लेकिन 38 प्राकृतिक कारणों से। बावजूद इसके आबादी में इजाफा हो रहा है, जो संरक्षण की मजबूती दर्शाता है।
पिछले पांच वर्षों में राज्य में बाघ 49 प्रतिशत बढ़े, जबकि देश में 24 प्रतिशत। यहां सालाना 12 प्रतिशत की दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। मृत्यु दर का ज्यादा रिकॉर्ड बेहतर ट्रैकिंग का नतीजा है।
विश्लेषण बताता है कि अधिकांश मौतें (69 फीसदी) प्राकृतिक—संघर्ष, रोग, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं। फसल सुरक्षा के लिए बिजली के जाल में 11 बाघ फंसे। तस्करी के इरादे से 6 का शिकार, लेकिन अमले ने तुरंत कार्रवाई की।
भारत में कुल 3682 बाघों में एमपी के पास 785। संरक्षित क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप, गश्त और संघर्ष न्यूनीकरण से भविष्य सुरक्षित है। राज्य संरक्षण का आदर्श बना हुआ है।