पूर्व इंग्लैंड स्पिनर नॉर्मन गिफोर्ड का लंबी बीमारी के बाद 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को बताया कि वॉस्टरशायर के इस दिग्गज का क्रिकेट जगत ने एक अमूल्य रत्न खो दिया।
वॉस्टरशायर के लिए गिफोर्ड ने इतिहास रचा। 1964-65 में काउंटी चैंपियनशिप की दोहरी जीत में उनका योगदान सराहनीय रहा। कप्तानी काल में 1974 का काउंटी खिताब और 1971 की संडे लीग विजय उनके नाम से जुड़ी हैं।
टेस्ट क्रिकेट में 15 मैचों में 33 विकेट लेने वाले गिफोर्ड ने पाकिस्तान के खिलाफ कराची में शानदार पांच विकेट हॉल किया। 2 वनडे भी खेले। खास बात, 1980 शारजाह टूर्नामेंट में 44 साल की उम्र में वनडे के सबसे उम्रदराज कप्तान बने, जब चोटिल सीनियर्स की कमी हुई।
इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान से हार मिली, मगर पाकिस्तान के विरुद्ध 4/23 का प्रदर्शन उम्दा था। वारविकशायर में पांच सीजन कप्तानी की और 48 की उम्र में 1988 में संन्यास लिया। नॉर्मन गिफोर्ड ट्रॉफी उनके सम्मान में वाइटैलिटी ब्लास्ट में खेली जाती है।
वॉस्टरशायर के प्रेसिडेंट और मानद वाइस प्रेसिडेंट रहे गिफोर्ड का करियर टोनी लॉक व डेरेक अंडरवुड से टक्कर के कारण सीमित रहा, लेकिन 1972-73 उपमहाद्वीप दौरे पर उनकी जोड़ी यादगार बनी। उनका जाना क्रिकेट परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।