चेन्नई के प्रसिद्ध कर्नाटक गायक टीएम कृष्णा संगीत की दुनिया को नई परिभाषा दे रहे हैं। 1976 में जन्मे इस कलाकार ने अपनी कला को सामाजिक आंदोलन से जोड़ा है। माता-पिता के प्रभाव में कम उम्र से प्रशिक्षित कृष्णा ने संगीत को मनोरंजन से ऊपर उठाया।
उनकी किताब दक्षिण संगीत की कहानी बताती है, जिसमें परंपराओं के साथ जातिवाद की कमियां उजागर हैं। कृष्णा पिछड़ी जातियों को कर्नाटक मंच पर लाने के पक्षधर हैं, जिसके लिए उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। फिर भी, वे मानते हैं कि कला सबकी होनी चाहिए।
एनोर क्रीक पर फैलते अतिक्रमण के विरुद्ध उनके प्रदर्शन चर्चित हैं। कोसास्थलैयर नदी के समुद्र से मेल को उद्योगों ने नष्ट कर दिया। ‘पोरंबोक’ प्रतीक बनाकर वे चेताते हैं कि विकास हमारी जिंदगी को भी वीरान कर देगा। इन गीतों को क्रीक पर ही गाकर उन्होंने प्रभाव बढ़ाया।
लोक और शास्त्रीय का मिश्रण कर कृष्णा संगीत को जीवंत बनाते हैं। सत्ता पर सवाल उठाने वाले उनके सुर प्रेरणा स्रोत हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में ऐसी विद्रोही आवाजें कम हैं, और कृष्णा इन्हें मजबूत कर रहे हैं।