मर्कोसुर के साथ यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते पर संसद का निर्णय जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ को नागवार गुजरा। उन्होंने इसे दुखद करार देते हुए कहा कि यह वैश्विक राजनीति की अनदेखी करता है। शनिवार को ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे के साथ यह ऐतिहासिक pact तय हुआ था।
दावोस में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे फ्री ट्रेड का नया अध्याय बताया। लंबी चर्चाओं के बाद बने इस समझौते से दोनों पक्षों के बीच शुल्क बाधाएं दूर होंगी, जिससे व्यापार में उछाल आएगा।
बुधवार को स्ट्रासबर्ग में 334-324 वोटों से संसद ने इसे न्यायालय के पास भेज दिया, ताकि पता चले कि क्या यह ईयू नीतियों से मेल खाता है। किसानों के प्रदर्शन ने माहौल गरमा दिया था—ट्रैक्टरों की कतारें संसद के बाहर खड़ी थीं और वोट के नतीजे पर हर्षोल्लास हुआ।
शोल्ज़ का बयान साफ था: ‘फैसला अफसोसजनक है। समझौते की वैधता पर हमारा विश्वास अटल है। इसे तुरंत अस्थायी रूप से लागू करें।’ यह घटना यूरोप के भीतर व्यापार और कृषि हितों के टकराव को सामने लाती है। समर्थक इसे रणनीतिक लाभ का माध्यम मानते हैं, जबकि विरोधी पर्यावरण और बाजार सुरक्षा की दुहाई दे रहे हैं। कोर्ट की सुनवाई से तय होगा कि यह बड़ा सौदा पटरी पर लौटेगा या नहीं।