कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने मतदाता सूचियों में पात्र नामों को हटाने की कड़ी निंदा की है। टोंक निर्वाचन क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत बीएलओ की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे असंवैधानिक और अमानवीय करार दिया। निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह हर मतदाता के अधिकारों की रक्षा करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि वोटिंग राइट्स पर कोई हमला स्वीकार नहीं होगा। यह लोकतंत्र का मूल आधार है।
विभिन्न राज्यों से मिल रही शिकायतों का हवाला देते हुए पायलट ने कहा कि चुनाव कर्मियों पर राजनीतिक दबाव डाला जा रहा है, जो चिंताजनक है। इस मामले को पारदर्शिता से सुलझाना जरूरी है।
राहुल गांधी द्वारा प्रमाणित अनियमितताओं और बिहार विधानसभा चुनावों के उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने आयोग की विश्वसनीयता पर उंगली उठाई। नागरिकों को अब ज्यादा जागरूक होकर चुनावी ईमानदारी सुनिश्चित करनी होगी।
स्थानीय बीएलओ की मेहनत की प्रशंसा की और कहा कि उनका योगदान अहम है। प्रक्रिया के अंत तक सजगता जरूरी है ताकि प्रशासनिक चूक से कोई वोटर प्रभावित न हो। कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे वोटरों को दस्तावेज सुधारने में सहयोग दें।