दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल जेल की सजा दी। पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल के मार्शल लॉ को बगावत मानते हुए यह फैसला आया, जिसमें हान की साजिशी भूमिका साबित हुई। यून को पहले पांच साल की सजा हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष ने 15 साल मांगे थे, मगर कोर्ट ने बगावत बढ़ावा, प्रमुख भूमिका और झूठे बयान पर सजा कड़ी कर दी। लाइव प्रसारण वाली सुनवाई में जज ने हान को तत्काल हिरासत में भेजा। उन्होंने कैबिनेट बैठक बुलाकर डिक्री का रास्ता साफ किया, विरोध न किया।
डिक्री हटने के बाद भी हान ने संशोधित घोषणा पर दस्तखत किए, उसे खारिज करने का ढोंग रचा और संवैधानिक अदालत में झूठ बोला। जज बोले, ‘संविधान रक्षक होने के बजाय उन्होंने विद्रोह चुना।’ हान का दावा है कि उन्हें योजना की पूरी भनक नहीं थी।
यह यून कैबिनेट का पहला दोषी है। यून का ट्रायल समाप्त, मौत की सजा की मांग पर 19 फरवरी को फैसला। दिसंबर 2024 का यह कांड दक्षिण कोरिया की राजनीति में भूचाल लाया, लेकिन संस्थाओं ने लोकतंत्र बचाया। न्याय की यह जीत भविष्य के लिए चेतावनी है।