श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट से साफ है कि दिसंबर में कृषि श्रमिकों का सीपीआई-एएल सालाना 0.04 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों का सीपीआई-आरएल 0.11 प्रतिशत रहा।
खाद्य महंगाई में खास गिरावट देखी गई- कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत तथा ग्रामीणों के लिए -1.73 प्रतिशत। बेहतर फसल उत्पादन ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाई, जिससे दैनिक जरूरतों के दाम नीचे आए।
कमजोर तबकों के लिए यह बड़ी राहत है। अधिक पैसे बचने से वे अन्य जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर ऊंचा हो रहा है।
नई सीरीज (2019=100) 34 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों के 787 गांवों के आंकड़ों से तैयार की गई है। पुरानी 1986-87 सीरीज की तुलना में यह अधिक व्यापक और आधुनिक है।
व्यापक आंकड़ों में खुदरा महंगाई 1.33 प्रतिशत और थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 0.83 प्रतिशत दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में 2 प्रतिशत के आसपास रहेगी खुदरा महंगाई।
सरकार को अब उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि यह लाभ लंबे समय तक बना रहे।