लखनऊ, 21 जनवरी। अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायिका को लोकतंत्र का मूल बताया, जो न्याय, समता व संप्रभुता सुनिश्चित करती है। इस आयोजन ने लोकतांत्रिक मूल्यों को नई गति दी।
देशव्यापी प्रतिनिधियों के तीन दिवसीय मंथन से विकसित भारत-2047 के छह संकल्प उभरे। योगी ने ओम बिरला व हरिवंश के योगदान की सराहना की। विधायिका योजनाओं को साकार करती है और संवाद से संप्रभुता दर्शाती है।
भारत की पंचायत परंपरा प्राचीन है, विविधता में एकता का प्रतीक। पांच बार सांसद रहने के तजुर्बे से सदन प्रबंधन सीखा। यूपी में प्रश्नकाल विस्तार से 20 विधायकों को मंच मिला।
विकास बहस में 377 सदस्यों ने भाग लिया। विजन दस्तावेज के लिए 75 जिलों से 98 लाख सुझाव, आईआईटी कानपुर की मदद से तैयार। डिजिटल-पेपरलेस सिस्टम पर्यावरण हितैषी।
30 सत्र दिवस अनिवार्य, यूपी में लंबे सत्र। मुद्दों पर सक्रियता, विशेष चर्चाएं। सभी संकल्प पूर्णतः लागू होंगे, आश्वासन दिया। सम्मेलन अनुभव साझा का बेहतरीन प्लेटफॉर्म।