मुंबई 1973। राज कपूर ‘बॉबी’ के लिए माटी की महक वाली आवाज़ ढूंढ रहे थे। चैरिटी में बुल्ले शाह गाते चंचल ने जीत लिया। ‘बेशक मंदिर मस्जिद’ ने स्टारडम दिया, फिल्मफेयर सहित। पर भक्ति की राह वैष्णो देवी बुला रही थी।
1940 अमृतसर जन्म। शिक्षक ने चपलता देख ‘चंचल’ नाम दिया। मां की भक्ति ने संगीत सिखाया। आरती-भजन बचपन से साथी।
आवाज़ चली गई, गायक का सबसे बड़ा संकट। प्रार्थना से लौटी, माता का चमत्कार।
जागरण में सुधारक बने। समाज सुधार के संदेश दिए। ‘चलो बुलावा’, ‘शेरांवालिये’ पर झूमे भक्त।
वैष्णो देवी से गहरा लगाव। कटरा में वार्षिक मेले। गाने यात्रियों को ताकत देते।
एनआरआई के दिल जीते, जॉर्जिया ने सम्मान दिया। कोरोना में वायरल गाना।
2021 में निधन, पर भजन जीवंत। आत्मकथा सिखाती सच्चाई की उड़ान।