अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्जे का ऐलान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भूचाल ला रहा है। ‘हम इसे ले लेंगे, कोई विकल्प नहीं’ कहकर उन्होंने यूरोपीय संघ को चुनौती दी है, जो लगातार विरोध जता रहा है।
रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने चेताया कि इससे नाटो का ढांचा चरमरा जाएगा। ‘कल आठ यूरोपीय देशों ने सैन्य बल भेजे—नॉर्वे, स्वीडन समेत। नाम एक्सरसाइज का, मकसद अमेरिका को संकेत देना कि ग्रीनलैंड आसान नहीं।’
नाटो के 32 देश अमेरिकी नेतृत्व और हार्डवेयर पर आश्रित हैं। ‘डेनमार्क पर अमेरिकी हमला नाटो को नेस्तनाबूद कर देगा। यूरोप को हथियार स्रोत, कमांड चेन सब नया बनाना पड़ेगा।’ 1951 समझौता खतरे में अमेरिकी सैन्य सहायता मानता है।
हालांकि, रूस या चीन से कोई प्रत्यक्ष संकट नहीं। ‘न तो चेतावनी, न संकेत। वेनेजुएला तेल की तरह, ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज ट्रंप का लक्ष्य। बिजनेस माइंड सेट।’
ट्रांसअटलांटिक गठबंधन पर संकट गहरा रहा है, यूरोप नई रणनीति की तलाश में।